Wednesday, June 19, 2024

शर्मिन्दा

महफ़िल में आज फिर छिड़ा था ज़िक्र तेरा 

आज फिर हम ख़ामोश और शर्मिन्दा होकर लौटे हैं

Monday, June 17, 2024

आदत

तेरे लिए जो करते थे इबादत नहीं छोड़ी

तुझे औरों में ढूँढने की आदत नहीं छोड़ी 

Sunday, June 16, 2024

अहमियत अहसासों की

कुछ लफ़्ज़ ना ही आए ज़ुबा पर तो बेहतर होगा 
बेक़दर क्या जाने अहमियत अहसासों की 

Social vs गणित

लाइफ़ ना रही “Social” बिल्कुल भी 

जब से इश्क़ केगणितमें पड़ गए

क़र्ज़

मोहब्बत है एक क़र्ज़ अनमोल 

लेकर इसे चुकाता है कोई कोई। 

दूर पास

उसे दूर तलक ढूँढते ढूँढते 

कितने लोग गुज़र गए पास से

मशवरा

एक मशवरा है 

लेकिन बर्खुरदार 

आएगा समझ तुम्हें लुट जाने के बाद ही …

छोड़ दे ये इश्क़, क़सम से बड़े घाटे का सौदा है