टेक लिए माथे सब जगह
पहन के देख लिए ताबीज़ सारे
फिर भी नज़रंदाजी तेरी घटती ही नहीं
मेरी समझ से बाहर है
ऐ सनम कौनसे जहाँ का खुदा है तू …
टेक लिए माथे सब जगह
पहन के देख लिए ताबीज़ सारे
फिर भी नज़रंदाजी तेरी घटती ही नहीं
मेरी समझ से बाहर है
ऐ सनम कौनसे जहाँ का खुदा है तू …
मैं खुद ही ले लेता हूँ ज़िम्मेवारी सारी
हमारे रिश्ते के हषर की,
तू खुद को बेवज़ह बेक़सूर साबित ना कर
तुझे मिलने से पहले भी अकेला ही था मैं,
ना जाने अब क्यूँ हो गया हूँ अधूरा तेरे जाने के बाद