Monday, August 12, 2024

खुद से मुलाक़ात

आईने से कर बात कभी 

ख़ुद से कर मुलाक़ात कभी

क़िस्मत को कोसते जी रहा है

और मर जाएगा यूँ ही इक दिन रो रोकर 

क्यों रह गया है पीछे 

क्या कमियाँ है तुझमें 

हो खड़ा और 

मर्दों की तरह ख़ुद से कर स्वालात कभी 

आईने से कर बात कभी 

ख़ुद से कर मुलाक़ात कभी

Sunday, August 11, 2024

बचपन को तरसते हैं

बड़ी ही बेसब्री से करते रहे इंतज़ार जिसका बचपन में 

पहुँच कर उसी बेरहम जवानी में 

अब हम अपने बचपन को तरसते हैं

दुआ

जा माफ़ किया तुझे और देता हूँ दुआ 

आने वाले वक़्त में ख़ुदा तेरी औलाद को तेरे जैसे से बचाए

Saturday, August 10, 2024

बेहतरीन शायर

बेरहमी की सभी हदें कर दी हैं पार 

मेरा दिल तोड़ने में उसने  

लगता है बेहतरीन शायरों में होगा अब नाम मेरा 

Friday, August 9, 2024

गवाही

कैसे करूँ ब्याँ कि कितना  ग़ज़ब था अंदाज़-ए-इल्ज़ाम उनका

कि ख़ुद के ही ख़िलाफ़ हँस कर गवाही दे दी हमने 

Saturday, August 3, 2024

वही इश्क़ कहानी

रोज़ लिखता हूँ नज़्म नई 

मगर वजह बस वही एक पुरानी है 

टूट कर चाहा जिसे तोड़ गया ग़रूर वही

अपनी भी यारों तुम्हारे जैसी ही वही इश्क़ कहानी है 

Friday, August 2, 2024

तुझे याद नहीं आती मेरी कोई बात नहीं

तुझे याद नहीं आती मेरी 

कोई बात नहीं

मुझे भी कहाँ अब मेरा ख़याल आता है 

क्यों छोड़ा तूने 

छोड़ा किसके लिये 

ये सब रह गया इक उम्र पीछे 

जब से घेरा है ज़िम्मेदारियों ने 

अब ज़हन में कहाँ 

ख़ुद के लिए कोई ख़याल आता है 

तुझे याद नहीं आती मेरी 

कोई बात नहीं